पप्पू (the untold story)
बात सैकड़ो वर्ष पुरानी हैं राजस्थान के जैसलमेर में एक करोड़पति जाट रहा करता था,धन्यधान्य और शौहरत में कोई कमी नही थी,परन्तू उसका विवाह नही हुआ उसने अथक प्रयास किये पर सफल नही हुआ।
फिर एक दिन वो निराश हो घर छोड़कर चुपचाप उस शहर से निकल गया।एक रोज़ हताश निराश एक जगह बैठा हुआ था,की एक सुंदर कन्या को कुछ सखियों संग ठिठोली करते देखा,वो उस पर मोहित हो गया,उसने उसका पीछा किया तो पता चला कि वो एक बड़े व्यापारी की पुत्री हैं, उसने उसे पाने के लिये उस बनिये के यहाँ नौकरी कर ली, धीरे धीरे उसने उस कन्या को अपने प्रेम जाल में फांस लिया।
एक रोज़ वो उस लड़की से बोला कि तुम्हारा पिता कभी भी हमारे विवाह को राजी नही होगा क्योंकि हमारी जात अलग हैं इसलिये क्यो ना हम यहाँ से भाग चले?
प्रेम में अंधी लड़की ने हाँ कर दी,वो एक ऊँटनी खरीदने के लिये निकल गया,ऊँटनी वाले से बोला कि आज रात को मुझे एक ऊँटनी चाहिये,पैसा मुँहमाँगा दूँगा पर ऊँटनी ऐसी देना तो 100 कोस तक चल सके।
ऊँटनी बेचने वाला बोला कि ऐसी एक ऊँटनी तो हैं जो आपको 100 कोस अवश्य ले जायेगी,
जाट बोला कि इसकी क्या गारंटी हैं ??
वो बोला कि इसकी नानी इस इलाके की सबसे मशहूर धावक रही हैं, बस एक बात का ख्याल रखना की पानी के धोरे(जलधारा) सामने नही आना चाहिये,पानी को ये लांघेगी नही।
जाट बोला क्यों ??
वो बोला कि इसकी नानी में यही दोष था, इसमें भी होगा,
जाट बोला कि किसी पागलों जैसे बात करता हैं भला ऐसा होता हैं कही ??
उसने उसका पैसा दिया और रात को लेने की कह कर चला गया।
रात्रि के तीसरे पहर वो ऊँटनी लेकर सेठ की हवेली के पीछे पहुँचा जहां छत से रस्सी से लटक कर वो उस लड़की को लेकर भाग लिया।
कई मील चलने के बाद अचानक ऊँटनी पलट गई,उसने खूब ऐड मारी पर वो टस से मस नही हुई।
उसने उतर कर देखा तो वो दंग रह गया क्योकि उसके सामने एक किसान खेतो में पानी लगा रहा था, वो पानी एक नाली बनाकर एक खेत से दूसरे खेत में जा रहा था।
जाट के कानों में ऊँटनी बेचने वाले के शब्द गूँजने लगे,
और उसका दिमाग फिर गया उसने मन मे सोचा की जब एक जानवर की बुराई पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं तो इंसान में भी अवश्य ही ऐसा होगा,
आज मैं इस लड़की को भगा के ले जा रहा हूँ कल इसकी और मेरी संतान होगी,वो भी किसी के साथ भाग जायेगी।
उसने ऊँटनी को घुमाया और लड़की को वापस उसके घर छोड़ अपने घर लौट गया।
शादी विवाह से पूर्व गोत्रों का मिलान इसीलिये किया जाता हैं, समान गोत्र में शादी सदा ही दुःखी करती हैं, कोई माने या ना माने।
खुद को दत्तात्रेय बताने वाले ठग, तेरी उत्पत्ति इस दुनिया का आठवां अजूबा हैं, तू ना हिन्दू हैं, ना मुस्लमान और ना ईसाई।
तू कई धर्मो और जातियों के संक्रमण से उत्पन्न खच्चर हैं,
जिसे घोड़ा बताकर राजनीति में चेपा जा रहा हैं,
पर तु अपने पूर्वजों की तरह अयोग्य था, अयोग्य हैं और अयोग्य ही रहेगा।।
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