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*प्रथम आर्य सत्य - दुःख है ।*
*जब हम कहते हैं कि विपश्यना साधना से हम दुखों से मुक्त हो सकते हैं, तो पहले यह जान लेना आवश्यक है -*
*दुख क्या है?*
*सम्यक सम्बुद्ध ने पहला आर्य सत्य बताया है कि जीवन में दुख है -*
🔹 *1. जन्म लेने का दुख।*
🔸 *2. बीमार होने का दुख।*
🔹 *3. बुढ़ापे का दुख।*
🔸 *4. मृत्यु का दुख।*
🔹 *5. दुख आने का दुख।*
🔸 *6. सुख जाने का दुख।*
🔹 *7. मनचाहा न होने का दुख।*
🔸 *8. अनचाहा हो जाने का दुख।*
🔹 *9. प्रिय वस्तु/ व्यक्ति के वियोग का दुख।*
🔸 *10. अप्रिय वस्तु/ व्यक्ति के संयोग का दुख।*
🔹 *11. अपमान का दुख।*
🔸 *12. निर्धनता का दुख।*
🔹 *13. अतीत की यादों का दुख।*
🔸 *14. भविष्य की आशंका का दुख।*
🔹 *15. वर्तमान में अतृप्ति-असंतुष्टि का दुख।*
*कितने दुख लगे हैं, हमारे जीवन में, कोई गिनती नहीं। दुख ही दुख का समुंदर लहराता रहता है। इस संसार में दुख से कोई नहीं बचा है।*
*अधिकांश मनुष्य शुतुरमुर्ग की भाँति इस सच्चाई से आँख मूंद कर अपने आपको झूठ की प्रवंचना में भरमाए रखना चाहता है।*
*समझदार लोग दुख के वास्तविक कारणों का पता लगा कर हैं उससे मुक्ति का रास्ता खोजते हैं।*
*विपश्यना साधना में हम दुख का कारण जान उससे छुटकारा पाने का उपाय सीखते है।*
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