#लव_जिहाद : मामला दिल का नहीं है......
‘‘क्या आपको पता है कि ‘केरल’ में जन्म लेने वाले प्रति 100 बच्चों में से लगभग 42 बच्चे मुस्लिम होते हैं..जबकि राज्य में मुस्लिम जनसंख्या 26.56 प्रतिशत ही है।’’
ये शब्द केरल के पूर्व पुलिस महानिदेशक टी.पी. सेनकुमार के हैं। राज्य में तीसरे, चौथे और पांचवे बच्चे को जन्म देने की दर हिन्दुओं की तुलना में मुसलमानों में क्रमशः 4 गुना, 11 गुना और 10 गुना है। इसके मायने हैं कि केरल में चौथे बच्चे को जन्म देने वाली माताओं में अगर एक हिन्दू हो तो 11 मुस्लिम होती हैं। मुखमंत्री ओमन चांडी ने 25 जून 2012 को राज्य विधानसभा को सूचित किया था कि 2006 से 2,667 हिन्दू युवतियां इस्लाम में कन्वर्ट की जा चुकी हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार केरल में प्रतिदिन 8 लड़कियां संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो रही हैं।
केप्द्रीय खुफिया एजेंसियों को मिली सूचना के अनुसार देशभर में ऐसी 4000 युवतियां थीं, जिन्हें ‘लव जिहाद’ के जरिए इस्लाम में कन्वर्ट किया गया था और फिर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों नें उन्हें जिहादी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित किया था। महंगे मोबाइल फोन और नई मोटर साईकिलें ‘लव जिहाद’ अभियान में सबसे कारगर हथियार साबित हुई हैं। एक ‘लव जिहादी’ था कासरगोड का ‘अब्दुल रज्जाक’ जो पकड़े जाने तक 42 लड़कियों को अपने जाल में फंसा चुका था। उसका सम्बंध सैक्स रैकेट से भी था। ‘लव जिहाद’ में शामिल मुस्लिम युवकों को ‘इस्लाम की खिदमत’ की एवज में रोजाना 200 रुपये जेबखर्च दिया जाता है और काम हो जाने की एवज में एक लाख से लेकर 7 लाख रुपये।
हिन्दू लड़कियों को श्रेणीबद्ध भी किया गया है कि किस श्रेणी की लड़की को फंसा लेने पर कितना इनाम दिया जायेगा, जो इस प्रकार है- सिख लड़की 7 लाख, पंजाबी हिन्दू व गुजराती ब्राह्मण 6 लाख, ब्राह्मण 5 लाख, क्षत्रिय 4.5 लाख, कच्छी व जैन/मारवाड़ी 3 लाख, पिछड़ी जाति व वनवासी 2 लाख, बौद्ध 1.5 लाख।
समस्या सिर्फ कन्वर्जन या जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने की नहीं है, समस्या के 2 पहलू और भी हैं। एक यह कि कन्वर्टेड लड़कियों के अधिकार समाप्त हो जाते हैं जो हिन्दू रहते हुए उन्हें उपलब्ध थे। और दूसरे यह कि इन कन्वर्टेड लड़कियों का इस्तेमाल बच्चे पैदा करने की फैक्ट्री के तौर पर या आतंकवाद में किया जाता है। इसमें ‘निकाह’ सबसे अहम कड़ी है। निकाह तभी हो सकता है जब लड़का और लड़की दोनों मुसलमान हों। जैसे ही हिन्दू लड़की निकाह के लिए सहमति देती है उसका जीवन शरीयत कानूनों के तहत आ जाता है। शादी के काफी बाद जाकर उसे पता चलता है कि जिसे वह अपना प्रेमी समझ रही थी, वह पहले ही कितनी ही बार का शादी-शुदा है और पहले से उसके अनेक बच्चे हैं।
कुरान शरीफ में ‘अल-तकिया’ का सिद्धांत है, जिसमें मुसलमानों को जरूरत पड़ने नर काफिरों को मूर्ख बनाने और धोखा देने की तथा अपना मजहब उजागर न करने की अनुमति दी गई है। मुस्लिम लड़के ‘लव जिहाद’ के दौरान इसी ‘अल-तकिया’ सिद्धांत के तहत मंदिर भी चले जाते हैं, हाथ में कलावा भी बांध लेते हैं, तिलक लगा लेते हैं और प्रसाद भी खा लेते हैं। उससे इंकार सिर्फ निकाह के चंद रात बाद किया जाता है।
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