#डिस्क्लेमर - मैं न तो नोटा सपोर्टर हूँ, न ही ऐसे घटिया किस्म की बकैती के लिए अपना समय व्यर्थ करने में विश्वास रखता हूँ। पूरी पोस्ट पढ़े बिना बकैती की कोशिश न करें।
अब मैं किसी भी मसखरे की कॉमेडी नहीं सुनता, बड़े व्यंगों को नहीं पढ़ता,
मेरा ये प्रहसनों का सूखा आज के स्वघोषित दक्षिणपंथी पूरा करते हैं जो कभी गटर गैस तो कभी बत्तख ऑक्सीजन, कभी नोट में जीपीएस चिप तो कभी गन्दी गालियों भरी मनोहर कहानियाँ लिख डालते हैं।
आजकल सबसे टॉप पर चल रहा है #नोटा_पुराण।
कोई लिख रहा है महाभारत के युद्ध मे अर्जुन नोटा दबाने वाले थे, कोई कह रहा है कि मन्थरा ने कैकेयी से नोटा दबवा दिया था, तो कोई रावल रत्न सिंह और पद्मिनी माँ के प्रसंग में नोटा मिला रहा है।
नोटा कुछ भी नहीं है। नोटा मतलब "इनमें से कोई नहीं" होता है। लम्बी सी लाइन में घण्टे भर खड़े होकर कोई नोटा दबाने बूथ पर नहीं जाता। नोटा एक सड़ा हुआ विकल्प है, लेकिन उस सड़े विकल्प से भी सड़े हुए विचार आजकल के मट्ठाधीश प्रकट कर रहे हैं।
कोई अपने ही लोगों को सरकार से असहमति जताने के लिए नोटा सपोर्टर घोषित कर गन्दी गन्दी गालियाँ दे रहा है, तो कोई सीधा कांग्रेस पार्टी या किसी और दल से पैसे खिलाने जैसे नए नए शिगूफे छोड़कर लोगों को उल्लू बना रहा है।
सरकार के अंदर एक ऐसा भी गुट है जो अपने "विशेष" मुद्दों के लिए ताबड़तोड़ काम किये जा रहा है, बाकी हमारे सुपर स्टार नेतागण केवल एक व्यक्ति के पीछे छुपकर छुट्टियां बिताने में मन लगा रहे हैं। किसी को भी थोड़ी सी शर्म नहीं आ रही है कि कौन से मुद्दे अबतक अधूरे पड़े हैं। हल्की बूंदाबांदी होती है कभी कभी और मन आह्लादित होने लग जाता है लोगों का।
न्यायपालिका ने भरपूर नौटँकी की है आपके साथ लेकिन आपने भी कौन सा काम ही कर दिया है 😁
2 जी घोटाले में कोर्ट ने सबूतों के अभाव बताया था, आपके वकील ने कोई कोशिश ही नहीं कि इसमें ध्यान देने की। ये कामचोरी है।
राम मंदिर मुद्दे पर आप इसमें ही अटके पड़े हैं कि सुनवाई पूरी बेंच करेगी या नहीं , समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड पे आपके ही विधि आयोग को इसकी जरूरत महसूस नहीं होती है। धारा 370 तो भूल जाइए, 35 A का क्या मस्त हाल है, सबको बताना जरूरी नहीं।
लगे हाथों आपने मास्टरस्ट्रोक पे मास्टरस्ट्रोक डाले हैं मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालकर। राम के बजाय भीमराव रामजी को बाँटा है हर जगह। सुप्रीम कोर्ट ने जब दो प्रावधान हटाये तो आप का विशेष गुट खुद ही अध्यादेश लेकर आ गया ताकि वो घटिया कानून सही न हो पाए।
आप का एक अजीब समर्थक वर्ग ट्रिपल तलाक़ के नामपर पूरे यूनिफॉर्म सिविल कोड की लंका लगवा चुका है, आपको ये भ्रम है कि बुर्खे वाली मोमिना आपको वोट डालेंगी अपने इलाके की सदर के खिलाफ जाकर।
आपलोगों को पहले ही ध्यान रखना चाहिए था कि दक्षिणपंथ एक रक्कासा नहीं है जो आपके मास्टरस्ट्रोक पर थिरकेंगी। आपके सड़क पुल पुलिया रामजन्मभूमि कृष्णजन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर को वापस वो गौरव नहीं दिला पाएंगे। आपका नया फॉर्मूला लोगों को आगे जाकर होने वाले डेमोग्राफिक संकट से नहीं निकाल पायेगा। लेकिन घण्टा फर्क नहीं पड़ता आपको। पड़ेगा भी क्यों, बवाल मचा देते हैं लोग नोटा सपोर्टर बोलके।
अरे महानुभावों, ये बताइये क्या आपको राइट टू रिकॉल के बारे में पता है ? क्या आपने नोटा को हटाने के लिए कभी कुछ लिखा ? तो फिर ये नया नया पैंतरा क्यों अपना रहे हैं ?
जो भी घटिया किस्म की लोकनीति का विरोध कर रहे हैं उनपे पत्थरबाज़ी क्यों करवा रहे हैं ? अपने अंदर झाँक कर देखिये, क्या आपने 2014 में मेहनत इसलिए की ताकि कोई सड़क पुलिया के नामपर आपके बड़े मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाले ? क्या आप नहीं सोचते थे कि शिक्षा विभाग में वामपंथ को समूल नष्ट किया जाएगा ?
क्या आपको ये नहीं चाहिए था कि गलत इतिहास की जगह असली और सही इतिहास बच्चों को पढ़ाया जाए ?
Brainwashed Republic कितनों को ख़रीदवाई ? धर्म के नामपर कूड़ा पढ़वा देते हैं, सड़ेले लोगों की किताबें बिकवाते हैं लेकिन ढंग का कुछ लोगों तक पहुँचे ऐसी कोशिश की कभी आपने ?
नहीं न ? #OKDontMindHaan आप बहुत क्यूट हैं। खुश रहिये। बिंदी लगाइये, हरी चूड़ियाँ पहनिए, रातरानी का गजरा लगाइये और नाचिए। हम आते हैं पीछे से ढोलक बजायेंगे आपके लिए।
मनोविज्ञान में एक प्रसिद्ध केस स्टडी है, पिंजरे में बंद बन्दरों के गुट की, जिसमें एक सिरे से केला लटकाया जाता है। जो भी बन्दर उधर बढ़ता है, उसे सज़ा देने के बजाय सारे बन्दरों को पानी से नहला देते हैं। धीरे धीरे नए बन्दर घुसाए जाते हैं और पुराने वालों को निकाला जाता है। चार पाँच बार के बाद पानी डालना बन्द कर देते हैं। अब पहले प्रयोग वाला एक भी बन्दर पिंजरे के अंदर नहीं है। लेकिन अब कोई बन्दर आगे नहीं बढ़ता। जो भी कोशिश करता है उसे बाकी बन्दर पीट डालते हैं।
ये ही धिम्मी बनाने का तरीका है। आप खुश रहिये।
SC ST act मुस्लिमो और ईसाइयों पर भी लागू है सिर्फ स्वर्ण हिन्दुओं पर नहीं ।
जय श्री राम।
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