हमारा देश एक लोकतंत्र है , वास्तविक धरातल पर मुझे ये भीड़तंत्र समझ मे आता है , मैं हिंदुत्व की भावना से ओत प्रोत व्यक्ति हूँ क्योंकि यही एक शब्द है जो हमे अब आगे इस धरती पर जिंदा रख सकेगा , वरना मेरे हिसाब से अगर हिंदुत्व मजबूत नही हुआ तो भारतवर्ष मुस्लिम राष्ट्र होगा । और उसपे हुकूमत चीन की होगी, ऐसी स्थिति में भी मैं अपने आनेवाली पीढ़ी से कहूँगा। तुम सब बौद्ध बन चीन की ओर चले जाना , अगर 1947 में 800 साल हमारे ऊपर हुकूमत करने के बाद भी उन्होंने बँटवारा कर लिया तो हम बौद्ध बन के चीनियों की गुलामी कर लेंगे पर मुल्ला के इस्लाम की गुलामी नही करेंगे ।
अब बात आती है नोटा की और पिछड़े दलित पॉलिटिक्स की ,
मुझे ये वाक्य लिखते हुए हमेशा खेद होता है पर दिल को क्रूर करके मैं हमेशा लिखता हूँ
जिस लोकतंत्र में आज हमारा गला घोंटा जा रहा, जिस धरती को तुम अपना बताते हो, खुद को मूलनिवासी बता के
उस धरती को हमने अगड़ों ने अपने रक्त से सींच कर तुम्हे भीख में दिया है ।
आजादी हमारी रहम है, गाँधी जी वैश्य थे, लाला लाजपत राय से लेकर भगत सिंह से होते हुए चंद्रशेखर तक, पंडित बाल गंगाधर तिलक , मंगल पांडे , बिस्मिल , सुखदेव , गोखले ऐसे सैकड़ो नाम , सबका लिख दूंगा तो पोस्ट लंबी हो जाएगी
कौन थे ये लोग ?
अगड़े थे , किसके लिए लड़े ?
देश के लिए लड़े !
जानते थे लोकतंत्र आएगा हमारा महत्व खत्म हो जाएगा फिर भी उन्हें विश्वास था भारत के बहुसंख्यकों के मन मे इतना जहर तो नही ही होगा भविष्य में
यहीं धोखा खा गए वो लोग ,
वरना क्यों खून बहाते , मुसलमानो की तरह करते गुलामी अंग्रेजो की , और भीमा कोरेगांव के दलितों की तरह रहते अंग्रेजो के साथ , सावरकर कौन थे ? एक अनजान भूमि की जेल में जिस्म आत्मा सब खत्म हो गयी,
वो धोखा खा गए, मैं नही खाउंगा, मैं इस देश के पिछडो को अपने राजनैतिक विरोधी के रूप में देखता हूँ , जिसकी नजर हमे राजनैतिक रूप से शून्यता में पहुंचाना है ,
अगर ऐसा नही है तो आरक्षण के खिलाफ कोई पिछड़ा क्यो नही है ?
जबकि इसकी समय सीमा कब की खत्म हो गयी ।
और दलित मुस्लिम कॉम्बिनेशन और भी खतरनाक है , ये हमारे सामाजिक अस्तित्व को ही नकारते हैं ,
इनका नारा है, ब्राह्मणों यूरेशिया वापस जाओ ।
मुसलमान दलितों का इस्तेमाल कर रहें , वो इन्हें use करके राजनैतिक सत्ता पाते ही convert कर देंगे ,
ऐसा पाकिस्तान में हो चुका है जब मंडल जिन्ना के साथ लाखो दलित लेके पाकिस्तान गए थे और जिन्ना के मंत्रिमंडल में कानून मंत्री बने थे
अगर आरक्षण और SC/ST एक्ट जैसो का मुद्दा नही सुलझा तो भारत राज्य दर राज्य मुस्लिम बाहुल्य होता जाएगा
अगड़ों के खिलाफ राजनैतिक पार्टियाँ इसलिए हैं क्योंकि पिछड़े और दलित अगड़ों के खिलाफ हैं
और यहीं भारत का लोकतंत्र हार जाता है ,
यहीं समानता के सभी सिद्धांत धराशायी हो जाते हैं , जब समाज आपके खिलाफ है तो राजनैतिक पार्टी भी होगी
इसलिए नोटा वाले तुम्हारे दुश्मन नही हैं , तुम्हारे अपने हैं
नोटा का अर्थ रेस्टोरेंट में आई दो कौड़ी की थाली नही है जिसका उदाहरण देके तुम पूरे लक्ष्य को गाली दे रहे
जो लोग नोटा के साथ हैं उन्होंने अपने रिश्ते नाते अपनो के लिए सीमित कर लिया है ,
इसका मतलब है , हम उस नकली लोकतंत्र पर विश्वास ही नही करते जो तुम मेरे सामने चुनाव के माध्यम से ला रहे हर पाँच साल पे
इसका अर्थ है , हम अड़ कर खड़े हैं अपनी रक्षा के लिए
क्योंकि तुम्हारा लोकतंत्र और संविधान भीड़ के हाँथो बिक गया है ।
जो लोग नोटा के साथ हैं
वो मेरे अपने हैं
मेरा अपना समाज है ,
वो पिछड़े होकर कभी आरक्षण का विरोध नही करते बल्कि चुपचाप मलाई खा रहे
और हम अपनो की ही माँ बहन कर रहें , गन्दी गालियाँ दे रहें
किसके लिए ?
एक राजनैतिक दल के लिए जो हमारे सामाजिक विरोधियों के आगे नतमस्तक है ।
मेरे लिए नोटा समर्थन करने वाले मेरे अपने हैं
मैं उनके खिलाफ नही हूँ और गाली तो कत्तई नही देने वाला
जैसे मुसलमानो ने पाकिस्तान लिया था , एक परिवार वहां शिफ्ट हो गया एक यहाँ
कुछ वैसा ही हमे भी चुपचाप करना होगा
एक सर पे कफ़न बाँध सड़को पर निकलेगा
दूसरा सिस्टम में रह कर वर्दी की गोली से उसकी रक्षा करेगा ।
मेरा योगदान मेरी लेखनी है , मैं इतिहास पढ़ कर भविष्य बताता चलूंगा
अगर हम जीत नही भी सके गम नही
पर नतमस्तक नही होंगे
कदापि नही , हमारा रक्त इतना ठंडा नही।
जय भूमिहार जय परशुराम
"ठाकुर की कलम से"
Comments
Post a Comment