नरेन्द्र मोदी जी का दलित प्रेम/ राष्ट्र प्रेम!

नरेन्द्र मोदी जी का दलित प्रेम/ राष्ट्र प्रेम!
प्रधानमन्त्री के दलित प्रेम से चिढ़ें मत। कोई भी कमेंट करने से पहले इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।
कुछ लोगों की शिकायत है कि प्रधानमन्त्री दलितों से #अत्यधिक_प्रेम कर रहे हैं जो सच भी है।
लेकिन जब आप सब गहराई पूर्वक सूक्ष्मतम रूप से इस पर विचार करेंगे तो प्रधानमन्त्री आपको ग़लत नहीं लगेंगे।
दलितों को लेकर चार #अन्तरराष्ट्रीय_तत्वों में होड़ सी मची है। एक ओर इसे विदेशी धन के बलबूते #चर्च निगलना चाह रहा है तो दूसरी ओर #इस्लाम भी जय मीम और जय भीम का नारा देकर निगलने को तैयार खड़ा है। तीसरी ओर #अन्य_पन्थ भी इस समाज पर अपना अलग अधिकार जताता है तो चौथी ओर #कम्युनिस्ट पार्टियां इसे #धर्म_और_आस्था से #विहीन कर हिन्दुओंं से अलग करने पर आमदा हैं।

यह चारों के चारों अंतरराष्ट्रीय/अराष्ट्रीय तत्व हैं और इनमें से एक की ओर भी दलितों का झुकना ना तो भारत के लिए हितैषी और ना ही बहुसंख्यक हिन्दू समाज के लिए।

क्योंकि दलित इन चारों में से किसी एक से भी जुड़ते हैं तो हमारा देश और धर्म दोनों कमजोर हो जाएगा।
इसलिए प्रधानमन्त्री जी का पूरा जोर यह है कि दलितों को इन चारों #अराष्ट्रीय तत्वों के चंगुल में फंसने से कैसे रोकें?
ताकि न तो देश की दीवार में कोई दरार आए और न ही हिन्दुत्व कमजोर हो।

इसलिए आप प्रधानमन्त्री की दूरदृष्टि को गम्भीरतापूर्वक समझने का प्रयास कीजिए। दलितों पर फोकस होने का मतलब इन चारों के #जाल_में_फंसने से रोकना है। जब स्थिति सामान्य होगी और #देश_नियन्त्रण में होगा तो देशद्रोह के लिए कोई सर नहीं उठा सकेगा । #सनातन धर्म और #राष्ट्र सुरक्षित होगा।

इनकी अराष्ट्रीय तत्वो की जड़ो पर चोट की है मोदीजी ने... आपको पता है की दलित ईसाई पैसो की लालच मे बनते है इनके एन जी ओ पर प्रतिबन्ध लगाया गया है इसलिये वेटिकन भी चींतित है, ऐसे होता हे काम कांग्रेस और बीजेपी के शासन मे अन्तर है 60 वर्ष कांग्रेस का शासन रहा हे उन्होने कभी किसी एन जी ओ पर प्रतिबन्ध नही लगाया।

दलित-मुस्लिम गठजोड़ और साथ में ईसाइयत और कुछ लालची और बेवकूफ हिंदू कुल मिलाकर इतना मजबूत गठजोड़ बनेगा की मोदी सत्ता से बाहर हो जाएंगे।
फिर यह लोग क्या क्या जुल्म करेंगे इसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है। इसी कि काट के लिए मोदी जी अपने वोट बैंक की नाराजगी ले रहे हैं बहुत बेवकूफ नहीं है पर हारी हुई बाजी लड़ने से बेहतर है जीतने की कोशिश करना और मोदी जी वही कर रहे हैं।

कृपया समझने की कोशिश कीजिये। हिन्दू मृत्यु शय्या की निद्रा में है जो धर्म और देशहित के लिए जागना ही नहीं चाहता है।
मुझे मालूम है कि मेरी इस पोस्ट को बहुत सारे लोग गलत साबित करेंगे और बहुत से लोग नाराज भी होंगे। उनका नाराज होना जरूरी है क्योंकि वह भी समाज के लिए लड़ने वाले व्यक्ति हैं तो मैं उनसे क्षमा चाहता हूँ। लेकिन यह एक कड़वी वास्तविकता है इसे स्वीकार करना होगा और इस जहर को भी स्वर्ण समाज को ही पीना होगा।
"ठाकुर की कलम से"

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