२००४ में जब कांग्रेस दोबारा सत्ता में आई और सोनिया गाँधी अपनी सारी धूर्त चालों के उपरांत प्रधानमंत्री बनने से चूक गईं तो उन्होंने निश्चय किया कि पूरी दुनिया में फ़ैल रहे मुस्लिम आतंक के सामानांतर हिन्दू आतंकवाद या भगआ आतंकवाद की अवधारणा को पुष्ट करने का षड्यंत्र किया .
कारण क्या था पता नहीं मगर राहुल गाँधी का अमेरिकन प्रतिनिधि मंडल के सामने कहना कि " भारत को खतरा इस्लामिक आतंकवाद से नहीं भगआ आतंक से है ", दिग्विजय सिंह का मुंबई हमले को संघ की साजिश बताना , मोहन चंद्र की शहादत पर शंका , सलमान खुर्शीद के बयान , मतलब पूरी पार्टी किसी भी तरह हिन्दू को आतंकी ठहराने की फ़िराक में थी .
इसी कार्यक्रम के अंतर्गत एक भयंकर साजिश की गई और एक साध्वी प्रज्ञा देवी को और एक सेनानायक कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया गया .
दोनों की दृढ इच्छाशक्ति और मजबूत आत्मशक्ति ( विलपावर ) के चलते सिग्नोरा गाँधी को अपने नापाक इरादे धूल में मिलते नजर आ रहे थे इसलिए भयानक अत्याचार करके किसी भी तरह क़ुबूल करवाने का क्रूर प्रयास किया गया .
एक पवित्र , आध्यात्मिक और हिन्दू सन्यासिनी को गिरफ्तार करके उसके साथ हत्यारों और आतंकियों जैसी मारपीट की गई . उसे अश्लील गलियां दी गई ब्लू फिल्मे दिखाई गई और बलात्कार तक की धमकी दी गई . उसका बार बार नार्को एनालेसिस टेस्ट कराया गया किन्तु जब उस निर्दोष के पास बताने को कुछ था ही नहीं तो बताती क्या .
कर्नल पुरोहित ने आजादी के बाद अपने एक मित्र को बताया की उल्टा लटककर तब तक मारते थे जबतक बेहोश न हो जाऊं , और होश आने पर फिर मारते थे और ये सब हो रहा था एक धूर्त , लालची , चालाक और अंतर्राष्ट्रीय संदिग्ध महिला सोनिया गाँधी के इशारों पर . नपुन्सक, कायर , बहुसंख्यक हिन्दुओं के देश में . मुझे शर्म उन लोगों पर आती है जो आज भी इस षड्यंत्रकारी हत्यारे परिवार कि चरणचाटुकारिता करते फिर रहे हैं .
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