कुछ लोग, जिनका "राजनैतिक ज्ञान" सिर्फ शाम की दारु पीने के बाद निकलता हैं, या जो सीजनल पोलिटिकल एक्सपर्ट होते हैं, हमको आकर ज्ञान देने लगते हैं कि अटल के जाने के बाद थोड़ा इंतज़ार तो कर लेते राजनीतिक बात लिखने से पहले....!
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तो उन परम-ज्ञानियों को बता दूँ,
BJP और मोदी से नफरत करने वाले कभी "अटल की चिता की आग के ठंडा होने" का इंतज़ार नहीं करेंगे..! वे "लिब्ऱांडू + कांग्रेसी कल्चर" वाले, अपना नैरेटिव लेकर कल से ही शुरू हो गए हैं कि अब BJP में अब अटल नहीं हैं, मोदी अटल जैसे सौम्य नहीं हैं, मोदी अहंकारी हैं और अटल नरम थे.....!
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तो आपको बता दूँ, आज जो विपक्ष अटल सौम्य होने की दुहाई दे रहा है, उसी विपक्ष ने अटल जी का भी जीना दूभर किया हुआ था ! अटल जी बेहद सौम्य थे, इसीलिए वे एक वोट से सत्ता हार गए थे, इसीलिए बड़ी बेशर्मी से विपक्ष उनके हारने पर संसद में उनका मज़ाक उड़ा रहा था, वो सीन इन परम ज्ञानियों की यादों में कहीं भी नहीं होगा...!
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विपक्ष फिर से मोदी में अटल देखना चाहता है ताकि वो सारे साम दाम दंड भेद लगाकर मोदी जी को भी अटल जी की तरह सत्ता से बेदखल कर दे....! लेकिन ये मोदी हैं, अटल के शिष्य, और जब विपक्ष का स्तर भी एकदम रसातल में जा चूका है तो मोदी सौम्यता क्यों बरतें?
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शठे शाठ्यम समाचरेत,
यकीन है अटल जी ने मोदी को ये वाली दीक्षा ज़रूर दी होगी और मोदी ने वही दीक्षा का इस्तेमाल करके कांग्रेस को अब 50 से नीचे, और आगे और नीचे ले जाने का पूरा प्लान बना रखा है.....!
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तो "हे दारु पीने के बाद बनने वाले परम ज्ञानियों",
यहां ज्ञान न बघारें, यहां बड़े बड़े राजनैतिक ज्ञानी अपना ज्ञान बाँट रहे हैं,
अपनी राजनैतिक अज्ञानता का प्रदर्शन किसी "ठेके" पर करें......!
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