भाजपा हीं भविष्य

उस वक़्त उम्र यही कोई 5 वर्ष के आसपास रही होगी जब एक कमांडर जीप 'अटल, आडवाणी कमल निशान गूँज रहा हैं हिन्दुस्तान' का शोर करती मौहल्ले में आकर रुकी,उस वक़्त झण्डे,झण्डियाँ, बैनर,पोस्टर, बैच इत्यादि बहुत ज्यादा लगते और बँटते थे,चुनाव के वक़्त पूरे कस्बे में लंबी लंबी कतारो में झण्डियाँ लगा दी जाती थी,घरो की छतो पर झण्डे लहराते दिखाई देते थे,मेरे जैसे ढ़ेरो बच्चे बैच और झंडे मिल जाने की लालशा में कमांडर जीप पर छाये हुये थे,खींचतान में बड़ी मुश्किल से मुझे एक बैच मिल तो गया परन्तू उसकी पिन निकली हुई थी,उस वक़्त आजकल की तरह हिन्दू-मुसलमान, दलित-ओबीसी की धूल आँखों में झोंककर बीजेपी या काँग्रेसी नहीं बनाये जाते थे,जिसके हाथ जिस भी पार्टी का बैच,और झण्डा लग गया वो उसी का हो जाता था। उस वक़्त मेरे हाथ बीजेपी का बैच लगा गया पर उसकी टूटी पिन के कारन मैं उसे अपनी शर्ट की जेब पर लगा नहीं सका,मैंने दो आलपिन बैंड की और बैच में छेद कर उन्हें शर्ट की जेब में पिरोना चाहा पर दोनों आलपिन शर्ट से होती हुई मेरी छाती में जा धँसी, मुझे बहुत दर्द हुआ। उसे मुठ्ठी में दबाये मैं एक बार फिर कमांडर जीप के पास आया परन्तु अब सब ख़त्म था।
कुछ ही देर में एक बार फिर शोर सुन  दौड़ पड़े मगर इस बार जीप काँग्रेस की थी, उसमें बैठे व्यक्ति ने मेरे हाथ में बीजेपी का बैच देखा तो बोला की इसे फेंक दो तो बैच दूंगा पर जाने किस शक्ति के चलते मेरे हाथ से बीजेपी का बैच नहीं छूटा और मैं वापस घर आ गया।
इतने वर्ष हुये जीवन में जितने भी चुनाव हुये उनमें कमल के निशान के अलावा कभी किसी को वोट नहीं डाला।

2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब जाकर अहसास हुआ की 5 वर्ष की उम्र में बैच की जो आलपिन बाई तरह की शर्ट की जेब को छेदते हुये दिल में जा धँसी थी वो आज के दिन के लिये थी
ये मेरा और मेरे देश का सौभाग्य हैं जो हमें ऐसा प्रधानमंत्री मिला जिसने देश विदेश में भारत का मान बढ़ाया उसकी शान बढ़ाई।
लोग हमें भक्त कहते है अंधभक्त कहते हैं गालियाँ देते हैं परन्तू हमारी दिन प्रतिदिन उनमें निष्ठा गहरी से और गहरी होती जा रही हैं।

आने वाले युग नरेंद्र मोदी को याद करेंगे की कोई ऐसा बिरला भी भारत की राजनीती की गंदगी से निकला था जिसने भारत को उन्नति और तरक्की के मार्ग पर बढ़ाने के लिये किसी चीज की परवाह नहीं की।

भारत माता की जय
वंदे मातरम्

"ठाकुर की कलम से"

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