What's the Jouhar {जौहर}

जौहर क्या था  ? 

यह आत्महत्या नहीं थी  ! यह युद्ध नीति थी  ! अंतिम शस्त्र ! जब आप चारों  ओर से घिर गए हों और जीतने की कोई उम्मीद ना हो तो यह ब्रह्मास्त्र था, हार को जीत में बदलने के लिए !

इस नीति को समय काल परिस्थिति  के संदर्भ के बिना समझना मुश्किल है !

यह आत्म समर्पण नहीं था  ! बल्कि त्याग की पराकाष्ठा थी  !

यह आत्मसम्मान की रक्षा के लिया किया गया सर्वोच्च बलिदान था  ! यह संघर्ष की चरम  सीमा थी  ! यह तप था ,  यज्ञ की अंतिम आहुति ! पूर्णाहुति !

आज पद्मावत फिल्म को लेकर  हिन्दू समाज एक बार फिर चारों ओर से घिर गया है !

फिल्म बनाने वाला भी हिन्दू, उसमे अभिनय करने वाले  भी हिन्दू , सेंसर बोर्ड हिन्दू, जज हिन्दू, सरकार हिन्दू और तो और पूरी मीडिया हिन्दू !

मगर फिर भी पद्मावत को लेकर पिछले कुछ दिनों से  हिन्दुओं के सभी टेलीविज़न चैनल जिस तरह से एक फिल्म के पक्ष में प्रचार प्रसार कर रहे हैं , देख कर हैरानी नहीं होती !

क्योंकि पूर्व में भी हिन्दुओं के साथ यह होता रहा है !  यह वही गिरोह है जिसके सरगना ने चंद्रशेखर आजाद के लिए अंग्रेजो की मुखबिरी  की थी !

मगर आजाद अंतिम समय तक स्वतंत्र ही रहे और उनके द्वारा किया गया अंतिम  बलिदान जौहर ही था !

हिन्दुओं की मुश्किलें यहीं नहीं समाप्त हो जाती ! करनी सेना जो कुछ कर  रही है वो बिना योजना और नेतृत्व के है जिसके कारण लाभ कम हानि अधिक हो  रही है !

इसके द्वारा  भी राजनीति के अपनी व्यक्तिगत लाभ को कोई अगर साध रहा हो तो इससे इंकार नहीं  किया जा सकता !

यह तो कलयुग है , हम  त्रेता और द्वापर में भी यह सब देख और झेल चुके हैं !

लेकिन हिन्दुओं को इस चक्रव्यूह से निकलना श्रीकृष्ण सीखा गए हैं !

महाभारत में जब अर्जुन को अपनों के ही विरुद्ध लड़ना पड़ा और वे लड़े  भी और जीते भी ! हमे भी अपनों से लड़ना होगा, जीतने के लिए लड़ना होगा !

जो इसे एक मात्र फिल्म मान रहे  हैं ! वे सोये हुए हैं ! वे यह नहीं समझ पा रहे की यह जेहाद का ही एक सॉफ्ट रूप है ! जिन्हे इस तरह की फिल्मो में  कोई आपत्ति नजर नहीं आती, वे इतिहास उठा लें !

अफगानिस्तान फिर पाकिस्तान  और फिर बांग्लादेश कैसे बना ?

यह उन कदमों की धीमी पदचाप है !  यह पूरे देश को  कश्मीर बना देने  के लिए  उठाया गया एक और  कदम है !  जिसे तथाकथित  कलाप्रेमी समझ नहीं पा रहे या यूं कहे समझना नहीं चाह रहे  !

यह खिलजी के महिमामंडन की ओर लिया गया पहला कदम है ! और यह अंत में हमे उसी कबीली संस्कृति में धकेलने का प्रयास है जिससे  आज विश्व परेशान है !

क्या आप पकिस्तान में रहना चाहेंगे ? नहीं !

अगर आप अपनी अगली पीढ़ी को उस नर्क में जाने से रोकना चाहते हैं तो अंतिम शस्त्र का इस्तेमाल करना होगा और वो शस्त्र है "पद्मावत फिल्म को  ना देखना " !

अपन परिवार मित्रों रिश्तेदारों  हर स्तर  पर ऐसा माहौल बनाएं  की कोई भी इस फिल्म को  ना देखे !

यह सिर्फ राजपूतों की लड़ाई  नहीं है ! जब खिलजी मेवाड़ में घुसा होगा तो उसने फिर किसी की जाति देख कर  तबाही नहीं की होगी ! यह हम सब हिन्दुओं की लड़ाई  है !  यह सनातन संस्कृति  के अस्तित्व  की लड़ाई है !

यह गलती हम एक बार बाजीराव फिल्म के समय कर चुके हैं जब इसे हमने सिर्फ मराठा से जोड़ कर देखा था !

आज महान युद्ध वीर बाजीराव अब  मस्तानी  सरनेम के साथ जाना जाता है ! 

क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को रानी पद्मवती  का वो चेहरा बना कर दिखाना चाहेगें जो संजय लीला भंसाली जैसा एक  मानसिक बीमार दिखाना  चाहता है  !

यह फिल्म हमारे विरुद्ध किये जा रहे   षड्यंत्र की एक कड़ी  है! इसमें वे भी शामिल हैं   जो जौहर  और शौहर  में फर्क नहीं कर पाते  !

ऐसे कई कलाकार लेखक बुद्धिजीवी मिल जाएंगे जो इस फिल्म का समर्थन कर रहे हैं , ऐसों की  नायिकाएं  द्रौपदी से लेकर पद्मावती नहीं होतीं , बल्कि तैमूर - खिलजी और अकबर के हरम की शोभा बढ़ाने वाली सुंदरियां होती हैं ! 

इस फिल्म के समर्थन में जो लोग हैं उनमे गुलामी के अंश  अब भी बाकी रहा गए हैं !

इन्होने पहले मुग़ल फिर अंग्रेज और फिर एक परिवार की गुलामी की है !

इन्हे आत्मसम्मान का गुरूर नहीं ! यह रीढ़विहीन लोग हैं जो कहीं  भी  नतमस्तक हो सकते हैं !

इस फिल्म की सफलता इस गुलाम  सोच की जीत होगी ! इस तरह का घटना क्रम  धीरे धीरे हमारे अवचेतन मन पर असर डालता  है !

और हमे अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व ना करने  के लिए प्रेरित करके  सदा के लिए हमे  मानसिक रूप से जकड़ लेता है !

अगर शान से जीना है दोस्तों तो , " पद्मावती फिल्म ना देखने " को अंतिम शस्त्र की तरह खुल कर इस बार इस्तेमाल करो !  

अपने हर जानने वाले को यह समझाओ की इस फिल्म का ना देखना ही जौहर है ! इसे  एक बार करके तो देखों जीत का परम आनंद मिलेगा ! और हम  उसी तरह से आने वाली पीढ़ियों को ऊर्जावान बना कर  लड़ने के लिए प्रेरित करेंगे जिस तरह से सदियों से  रानी पद्मावती हम सब की प्रेरणा का स्रोत बनी है

Comments