Legend Cricketer Rahul Dravid

................टेस्ट बिल्ला no 207..................

इस इंसान की क्या तारीफ करें यार शब्द नही है मेरे पास और न ही किसी दुनिया के शब्दकोष में वो शब्द है जो इस इंसान की महानता को शब्दों में पिरो सके।
ये जो सहारा लिखा देख रहे है ना इनके टीशर्ट पे , हा बस वही थे ये पूरी टीम के लिए सहारा। जब सब घुटने टेक देते थे तो बंदा अकेले सबको खींच ले जाता था। मुझे आज भी वो दिन याद है जब द्रविड़ साहब ने 24 जनवरी 2012 को क्रिकेट को अलविदा कहा था और मैं जी भर के फुट फुट के रोया था। मैं आपने आप को बहुत खुशनसीब मानता हूँ कि मैंने उस दौर में जन्म लिया है जब द्रविड़ साहब ने खेलना शुरू किया था। हमने उस दौर को जिया है जब द्रविड़ साहब क्रिकेट पिच पर विरोधी गेंदबाजों के परखच्चे उड़ा दिया करते थे। हर बार अग्गरेशन का मतलब कोहली या गम्भीर की तरह विरोधियों को गाली देना या आंखे दिखाना नही होता है अग्गरेशन का मतलब अंगद की तरह पैर जमाना भी होता है कि ले भाई मुझे अब हिला के दिखा यहाँ से। ठंड़ीयो में सुबह 4 बजे उठकर मैच देखने पर मजबूर करने की कला केवल द्रविड़ साहब में ही थी। और उनके रिटायर होने के बाद आज तक वो फीलिंग नही आई।
बंदा मारता कम घसीटता ज्यादा था। 2003 का वो एडिलेड टेस्ट आज भी याद है जब सबने घुटने टेक दिए थे और बन्दे ने अकेले ऑस्ट्रेलिया और गांगुली सर को कह दिया था "मजनू अभी हम जिंदा है"। बल्ले से लगने के बाद भी 145 kmph की गेंद पिच एरिया से बाहर न जाने देने की निर्दयिता बस राहुल को आती थी। कभी कभी तो बॉलर फेडउप होक खुद ही कह देता था "सर अब तो मार लो चौका"।सर के ऊपर से गुजरती बाउंसर को भी कदमों में गिरा देते थे।
आज कल के जो ड्यूड कोहली के टैटो और स्टाइल के दीवाने है न उनसे केवल एक ही बात कहना चाहूंगा कि भाई शायद तुमने द्रविड़ सहाब के क्यूटेन्स का क्रेज नही देखा है लड़किया फिदा थी भाई उनपे फिदा , अपने ज़माने का कतई रणवीर कपूर था भाई अपना।

सचिन और द्रविड़ साहब में एक खाश फर्क ये था कि सचिन का सतक आप चाहते थे और द्रविड़ के सतको की आपको जरूरत होती थी।
Happy Birthday to greatest player of the cricket सलाम पहुचे क्रिकेट के सबसे बड़े जेंटलमैन को 🙏

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