गोपी नाथ मुंडे ,ग्रामीण विकास मंत्री सड़क हादसे में मारे गए. प्रशंसकों ने साजिश का शक बताकर CBI जाँच करवा दी। हुआ क्या ढाक के तीन पात ! पुलिस की आरंभिक जाँच से ही मोदी सरकार पता था कि ये मात्र दुर्घटना थी कोई साजिश नहीं !
मगर इससे हुआ ये कि CBI दूसरी जाँच छोड़कर इस आकस्मिक दुर्घटना में साजिश ढूँढने में लग गई जिसमें पैसा और वक्त दोनों बर्बाद हुआ. !
उधमसिंह नगर ,उत्तराखंड के जिलाधिकारी नोएडा के एक मॉल में सपरिवार पिज़्जा खा रहे थे कि अचानक सीने में दर्द से छटपटाकर नीचे गिर पड़े.. हॉस्पिटल में मृत घोषित किए गए.. मौत का कारण हार्ट अटैक...!
ऐसे ही हार्ट अटैक से जस्टिस लोया की मौत होती है.. मौत के तीन साल बाद पिता और बहन की भावनात्मक शक को पुख्ता साजिश बताकर वामपंथी पत्रकारों ने राजनैतिक गिद्धों के सामने मौत का मज़मा लगा दिया और अपने मालिकों के सामने वफादारी निभाने की कोशिश कर ली!
खैर... मेरा सवाल इतना है कि लोया परिवार ने मौत की साजिश होने पर भी उनका अंतिम संस्कार क्यों हो जाने दिया..? एक आम परिवार भी अपने सदस्य की मौत की साजिश के शक पर जाँच और अपराधी को पकड़ने की मांग पूरी करने के लिए उसकी लाश को चौराहे पर लाकर हंगामा करते हैं.. आप तो हाईप्रोफाइल केस के जस्टिस परिवार से थे.. आप चौराहे पर ना भी आते सिर्फ जाँच होने की माँग लेकर अंतिम संस्कार से मना कर देते तो देशभर में हंगामा हो जाता ! वामपंथी मीडिया दुम हिलाकर आपकी चौखट में तब तक रहता जब तक जाँच का परिणाम नहीं आ जाता ।
लेकिन.. जस्टिस लोया का बेटा अनुज लोया समझ चुका है कि राजनैतिक गिद्ध उसके पिता की मौत को साजिश बताकर नोच लेना चाहते हैं.! इसलिए उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सब स्पष्ट कर दिया ! अब भी जस्टिस लोया की मौत को साजिश बताकर सनसनी फैलाने वाले इस मौत को साजिश बता रहे हैं तो आप समय रहते अपना मानसिक इलाज करवाइए नहीं तो एक दिन ऐसा आएगा कि आपको केले खाने से भी दस्त होने लगेंगे रवीश कुमार जी !
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