Dr. Praveen Togadia

पत्ते खुल रहे है धीरे धीरे ......

BHP नेता प्रवीण तोगड़िया को लेकर अहमदाबाद में हुआ पूरा ड्रामा साफ तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के बीच चल रहे अंदरूनी संघर्ष की ओर इशारा कर रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बीजेपी इस बात से बेहद नाराज है कि तोगड़िया और वीएचपी कार्यकर्ताओं ने गुजरात के विधानसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया। हालांकि बीजेपी को जीत हासिल जरूर हुई, लेकिन सीटों का आंकड़ा 115 से घटकर 99 रह जाने से पार्टी में अंदरूनी तौर पर काफी नाराजगी थी।  बीजेपी के वरिष्ठ  नेताओं को लगता है कि पिछले साल के आखिर में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में वीएचपी कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी करने की काफी कोशिशें कीं । तोगड़िया ने  पाटीदार आंदोलन की आग में घी डालने की कोशिश की और बीजेपी के खिलाफ गुस्से को भड़काने का काम किया। यह एक बड़ी वजह थी कि हम इस बार के चुनाव में 100 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाए।'  तोगड़िया को आरएसएस की तरफ से साफ निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें राजनीतिक मुद्दों में दखल नहीं देना है, लेकिन फिर भी चुनाव से पहले उन्होंने गुजरात में कई किसान और युवा रैलियों को संबोधित किया और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की। आज की बीजेपी वाजपेयी युग की बीजेपी से एकदम अलग है। मौजूदा नेतृत्व पार्टी और संघ के अंदर से उठने वाली आलोचनाओं को बर्दाश्त नहीं करता।
यदि यह सच है तो निश्चय ही तोगड़िया जी ''विभीषण'' बन रहे है ।

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