Devide and Rule

काँग्रेस सत्ता पाने के लिये कुछ भी कर सकती है...इसका सिर्फ एक ही सिद्धाँत है-किसी भी तरह सत्ता पर काबिज होना। नेहरू ने ऐसी ही शुरुआत की थी।

दलितों के पीछे छिपे 'दल हित चिंतक' मास्टरमाइंड के गेम को समझें। उन्हेंं भड़का कर यह सब करवाया ही इसलिये जा रहा है ताकि हम प्रतिक्रया करें और वह धीमे धीमे मिट रहे जातीवाद को पुनः जिंदा कर अपने आकाओं को वापस सत्ता पर काबिज कर सकें। मौन रहने से भले आज कुछ नुकसान हो पर प्रतिक्रया भयंकर तबाही लायेगी। और नुकसान सिर्फ आपका होगा।
भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा पर उग्र प्रतिक्रिया देने से बचें, और शांति बनाये रखें। प्रशासन सँभाल लेगा। एक बहुत बड़ी तबाही मचाने की साजिश है यह। जो सामने दिख रहे हैं वह कंधे हैं, बंदुक किसी और ने पकड़ रखी है। रही बात जातीवाद की तो शिवाजी महाराज स्वयं पिछड़ी जाती से आते थे, भगवा ध्वजा पुरे देश में लहरा कर स्वराज की कल्पना उनकी ही थी, पेशवा को ब्राम्हण होने की वजह से नही क्षत्रिय गुण होने की वजह से सेना सौंपी गयी थी।
उस शिवाजी के साम्राज्य को रोकने के लिये अंग्रेजों के साथ मिलकर उनके आधुनिक हथियारों से लैस हो उस भगवा ध्वजा के वाहक पेशवाओं की हत्या का जश्न मनाना दुखद है। आप का कल भी इस्तेमाल हुआ था आज भी। वैसे भीमा कोरेगांव में बिना प्रतिक्रया किये उस घटना के समर्थकों को हर साल की तरह शांति से अपना कार्यक्रम निपटा वापस जाने दिया होता तो यही साजिशकर्ताओं की हार होती। पर कम से कम अब शांति से काम लें।
जय हिंद ...

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