मैं ब्राम्हण होकर भी माँ पद्मावती के ऊपर बनी फिल्म का विरोध करता हूँ
क्योकि हम हिन्दू सम्मान पूर्वक सर उठाकर जी सके इसलिए उन्होंने प्राण न्योछावर किये थे।
और सबसे बड़ी बात माँ पद्मावती के साथ जिन 16000 स्त्रियों ने अग्निस्नान किया था ये जरूरी नही की वे सभी केवल क्षत्राणियां ही हो उनमे कुछ हमारे भी पूर्वजो की माताएं जो महल मे रही होंगी वे भी तो शामिल होगी।
और अगर मैं मान भी लूँ की अग्निस्नान करने वालो में हमारे पूर्वजो की माताएं बहने नही होंगी तो तो ये कैसे मान लूँ की खिलजी और उनकी सैना ने उन जिंदा जिस्मो को नही नोचा होगा?
इसलिए अपनी माता के सम्मान में जाति भेद भूलकर आ जाओ मैदान में।
रानी पद्मिनी पर बनी फिल्म पद्मावती का विरोध सभी मिलकर करिये।
कृपया इसे राजपूत और गैर राजपूत में विभक्त मत कीजिये।
रानी पद्मिनी सभी के लिए आदर और गर्व का विषय है।
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