हरिनारायण ओझा से बने हरीहरानन्द सरस्वती जी ने जब अपने दोनों अंजुलियों को जोड़ जो भोजन मिल जाए ,खाना शुरू किया तब वो धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज के नाम से बिख्यात हुए ,स्वामी विवेकानंद और स्वामी करपात्री जी दोनों वेदो उपनिषदों को सबसे ज्यादा पढ़ा और समझा.
एक तेजस्वी महासंत जो तत्कालीन कांग्रेसी सत्ता को चुनौती देता था ,जिसने नेहरू का मान मर्दन के लिए राम राज्य परिषद् नाम के राजनैतिक दल को भी बनाया और बिहार से अपने उम्मीदवार को भी जीताया.
कियोंकि नेहरू ने कहा था ,भारत में कभी भी हिन्दु धर्म आप अपना कोई दल बनाके नहीं जीत सकता.करपात्री जी ने नेहरू का दम्भ तोडा ,इंदिरा को श्राप दिया.
करपात्री जी जब तक जिन्दा रहे ,इंदिरा उनके नाम से कांपती थी ,उस समय सिर्फ चार शंकराचार्य ही होते थे जिनका चयन स्वामी जी के हाथो में था ,सनातन धर्म का पताका सिर्फ एक महा तपस्वी के हाथो में था ,जो अपने चरम पर होते हुए भी निहायत सादगी में जीता था.
उनके स्वर्गवास के बाद ,सनातन धर्म बेलगाम हो गया ,कुकुरमुत्ते की तरह इत्र लगाए शंकराचार्य पैदा हो गए.अखाडा परिषद् निकम्मा हो गया.
परिणाम ,आसाराम ,रामपाल , रामबृक्ष यादव ,राम रहीम ,निरंकारी ,राधा स्वामी ,राधे माँ ,चक्रपाणि ,प्रमोद कृष्णन.......जैसे कई हिन्दु ह्रदय सम्राट ही हो गए.
संतो का जीवन कठोर और सादगी पूर्ण होता हैं तभी समाज में लोगो की आस्था धर्म के प्रति बढ़ती हैं ,चमत्कार ,ढोंग से संत दूर रहता हैं.
देश का दुर्भाग्य हैं ,छद्मी लोग हिन्दु ह्रदय सम्राट बन गए हैं , केशुभाई जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे ,प्रवीण भाई के काफिले में सैकड़ो गाड़ियों का काफिला होता था ,ऐसा लगता था , अहमदाबाद में अमेरिकी राष्टपति मेहमान बनकर आया हैं और उसका काफिला गुजर रहा हैं.
सादगी महाराज योगी जी में देखे , देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री दो जोड़ी गेरुवा बस्त्र लेकर मुख्यमंत्री आवास आता हैं ,ज़मीन पे सोता हैं ,और हर रोज गुंडों और आतंकियों का परिवार एनकाउंटर के बाद रोता हैं.
जिन्ना के प्रेमियों को पहचानो बरना सिगनोरा का कोठा फिर से गुलजार हो जायेगा ,दल्ले हार्दिक ने ह्रदय सम्राट से मिलाकर इशारा कर दिया हैं.
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