Congress crisis

आज का दिन भारत की सियासत में बेहद उतार चढ़ाव वाला रहा.. ज़िक्र करते हैं देश के बड़े हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया का.. सोमवार की सुबह तोगड़िया अचानक ग़ायब हो जाते हैं.. पूरा दिन अफ़वाहों का दौर चलता है कि ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा पाए तोगड़िया अचानक कैसे ग़ायब हो गए.. शाम होते होते पूरा मामला बेहद संदिग्ध होता चला जाता है और अचानक रात 10 बजे के लगभग एक पार्क में बेहोश पाए जाते हैं जहाँ से उन्हें अस्पताल पहुँचा दिया जाता है.. इन सबके बीच देर रात हार्दिक पटेल और गुजरात कांग्रेस के कुछ नेता उनसे मिलने अस्पताल पहुँच जाते हैं..

अगले दिन सुबह तोगड़िया एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और खुद को हिंदुत्व का पुरोधा बताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को ये कहकर कठघरे में खड़ा कर देते हैं कि.. सरकार उनका एनकाउंटर करना चाहती है..

आखिर ये चल क्या रहा है.. क्या ये समझा जाए कि अंदरखाने कांग्रेस और विश्व हिंदू परिषद आपस में हाथ मिला चुकी है... क्या तमाम दाँवपेंचों के बावजूद गुजरात हार चुकी कांग्रेस अब 2019 का चुनाव तोगड़िया के आसरे लड़ना चाहती है.. क्या राहुल गाँधी को मंदिर मंदिर घुमाने, हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश ठाकोर जैसे जातिवादी नेताओं से हाथ मिलाने के बावजूद गुजरात हारने वाली कांग्रेस अब हिंदूवादी नेताओं को अपने साथ शामिल करना चाहती है..

दरअसल इस दौर में कांग्रेस के लिए अपनी सियायत को बचाये रखना ही एक बड़ा सवाल हो गया है.. इधर कांग्रेस तोगड़िया के समर्थन में आती है और इसी बीच केंद्र सरकार या कहें मोदी सरकार हज सब्सिडी हटाने का फैसला ले लेती है..

मामला बड़ा पेचीदा हो चला है.. कांग्रेस कोई चाल चलती है और उससे बड़ी चाल प्रधानमंत्री मोदी चल देते हैं..  कुछ लोग तोगड़िया मामले पर सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं.. अपनी लाठियों को तेल पिलाते हैं.. शाम होते होते मोदी हज सब्सिडी हटाने का फैसला लेकर बाज़ी पूरी तरह पलट देते हैं.. लोग समझ ही नहीं पाते हैं कि तोगड़िया मुद्दे पर मोदी को गरियाएँ या हज सबसिडी मामले पर मोदी की पीठ थपथपाएँ..

जहाँ एक तरफ कांग्रेस को बार बार अपनी सियासी चालों को बदलना पड़ रहा है.. कभी नौसिखिए लड़कों का.. कभी सुप्रीम कोर्ट के जजों का सहारा लेना पड़ रहा है.. वहीं पीएम मोदी अकेले ही कांग्रेस की नाक में दम किये हुए हैं..

बहरहाल कांग्रेस के लिए ये समझना बड़ा मुश्किल हो चला है कि मोदी की सियासी चालों की काट का रास्ता आखिर जाता किधर है..

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