त्वरित प्रतिक्रिया============
आज दो राज्यो के नतीजे सामने आ रहे हैं एक तो गुजरात दूसरा हिमांचल प्रदेश । हिमांचल प्रदेश को लोग इसलिये तवज्जो नहीं देना चाह रहे हैं क्योंकि वो इलेक्शन स्वाभाविक परिणाम दे रहा है आदतन कांग्रेस हार रही है और भाजपा जीत रही है क्योंकि यहां प्रतिसत्ता बल तथा मोदी-योगी इफ़ेक्ट साफ नजर आ रहा था । किंतु मूल्यांकन का वाला चुनाव रहा है गुजरात का ।
गुजरात चुनाव में जो दोनो पक्ष थे उसमें प्रथम पक्ष था "सबसे पुरानी पार्टी के अपरिपक्व लोगों का" तथा दूसरा पक्ष था "अपेक्षाकृत नई पार्टी के परिपक्व लोगों का" । क्योंकि कांग्रेसी नेता खुद को चाहे जितना भी बड़े राजनीतिज्ञ समझते हों पर गुजरात चुनाव में उनका रवैया अत्यंत बचकाना रहा उन्होंने राजनीति का वो हथकंडा अपनाया जो की अस्सी के दशक में मुलायम और लालू तथा 90 के दशक में मायावती अपनाती थी ।उन्होंने गुजरात के मुलायम, लालू और मायावती जिग्नेश, अल्पेश और हार्दिक को इकट्ठा कर राहुल के नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहा । जो एक जागरूक प्रदेश की जनता को गवारा नहीं था ।
भाजपा की गुजरात में जो कमजोरियां थी वो कुछ इस तरह थी -
1- नोटबन्दी और GST के जो भी कुप्रभाव थे वे अपने चरम पर थे ।
2- मोदी की गुजरात में प्रत्यक्ष राजनीतिक अनुपस्थिति में पहला चुनाव था पिछले 15 सालों में ।
3- जैसा कि हमेशा होता है एक प्रतिसत्ता बल भाजपा के विरुद्ध काम कर रहा था । जो कार्यकर्ताओ और नेताओं के दम्भ के कारण उपजता है ।
4- मुख्यमंत्री पद के लिए किसी बड़े और प्रभावशाली चेहरे का अभाव रहा था ।
5- राजस्थान में चल रही गतिविधियां जहां पर कानून व्यवस्था को बनाये रखने में बाधक तत्वों पर की गई कार्रवाई के कारण कुछ अतिउत्साही हिन्दू भाजपा को सबक सिखाने की सोच के साथ बैठे थे ।
पर कांग्रेस पूर्णतया अक्षम रही है इन सारे मौकों को भुनाने में उसे लगा कि अगर बीजेपी हिन्दुओ के भरोसे जीत रही है तो हम फिर से हिन्दुओ को अलग अलग जातियों में बांटकर उसके इस मन्तव्य को धूमिल कर देंगे इसके लिए उसने तीन लड़कों का सहारा लिया जो घाटे का सौदा साबित हुआ ।
कांग्रेस ने हल्ला तो खूब मचाया GST और नोटबन्दी पर लेकिन वो उसके नुकसान जनता को समझाने में नाकामयाब रही ।
चुनाव के अंतिम में दिनों में मोदी की अनुपस्थिति को भुनाने के बजाय अपनी पुरानी आदत का अनुशरण करने लगी "sucide goal" वाली आदत पिछले 15 सालों से जिस मोदी को टारगेट करने के कारण उसे मुंह की खानी पड़ी उसे ही वो लोग फिर से टारगेट करने लगे । इन्हें ये बात समझ क्यों नहीं आती कि जो लोग मोदी से घृणा करते हैं वे लोग पहले से आपके साथ हैं आपको लाना उसे है जो मोदी के पाले में हैं । वे लोग इस घृणा फैलाने से नहीं आएंगे बल्कि सरकार की नाकामियां सिद्ध करने से आएंगे यदि आप उन्हें वे कारण याद दिलाएंगे जिसके कारण वे मोदी के साथ हैं तो वे कतई नहीं आएंगे ।
कांग्रेस के जीत से दूर रहने का एक बड़ा कारण है राहुल गांधी की "मसखरा छवि" राहुल गांधी को कांग्रेसियो के अलावा कोई सीरियसली नहीं लेता अगर लेना भी चाहे तो नहीं ले सकता क्योंकि वे ऐसी ऐसी छोटी छोटी गलतियां करते हैं कि उनकी छवि अभी भी बच्चे की बनी हुई है उनके स्थान पर नेतृत्व परिवर्तन करके देखे कांग्रेस किसी संजीदा नेता जो परिवार से बाहर का हो उसे मौका देती तो बेहतर परिणाम मिलते ।
अगर कोई पार्टी आज के समय में भी किसी प्रदेश में पिछले 22 सालों से काबिज हो और उसकी कुछ सीट्स ही आप घटा पाये हैं तो फिर से ये उसकी बहुत बड़ी जीत है और आपकी करारी हार क्योंकि आप प्रतिसत्ता बल को भुनाने में अक्षम रहे हैं । जो गुजरात में जमीनी स्तर पर था । गुजरात में बीजेपी की जो भी सीट्स कम हुई है उसके बस दो ही कारण हैं एक प्रतिसत्ता बल दूसरा राजस्थान में हुए मामले और कोई फैक्टर या कोई नेता कुछ नहीं कर सका है अगर राहुल, अय्यर आदि ने एक दिन भी प्रचार न किया होता और अपना मुंह बंद रखते तो भी इससे ज्यादा सीट्स पॉय जाती कांग्रेस उसे उसके नेताओ ने हराया है जनता ने नहीं इसलिए बाकी मुद्दों का रोना बन्द कीजिये और राजनीतिक परिपक्वता लाइये पार्टी में अगर बीजेपी से लड़ना है नहीं तो हारते रहो रोते रहो रोना बहानों का ।
भाजपा को हार्दिक बधाई इस जीत के लिए ।।
एक बात और जोड़ना चाहूंगा गुजरात चुनाव ऐसे दौर में लड़ा जा रहा है जो भाजपा का सबसे बुरा वक्त है आने वाले 7-8 साल में इससे बुरा समय नहीं आएगा भाजपा का भारत में अब आगे ही बढ़ेगी भाजपा इस प्रदर्शन से
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