अरे दादा!
जज साहब हम अपने नौ नौ ठुई बच्चों और अपनी मंदबुद्धि बीवी की कसम खा के कहते है, कोरे कागज पर हमसे लिखवाईलो, ई सब ससुरा मोदिया का किया धरा है। हम तो मकई का भात और साग बड़ी मुश्किल से खा पाते हैं ससुर, आऊर हम ई भईसिया का चारा कईसे खा सकते हैं हुजूर।
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