लोकतंत्र में सत्ता इकबाल से चलती है, जिसे क्रेडिबिलिटी कहा जाता है...
आपके शासन में जब सारा भौकाल चुनावी भाषणों में ही रहता है, आपके कोर इश्यूज घोषणा पत्र में सीमित हो जाते हैं, भ्रष्टाचारी मून वॉक करते हुए बरी हो जाते हैं, विकास के विराट मॉडल की हवा कल के लौंडे निकाल देते हैं, 99 फीसदी शांतिदूत आपको पसंद नहीं करते हैं, तब भी आप 'सबके साथ' सबका विकास के लिए गिड़गिड़ाते हैं...
अरे विकास की इन्हें घन्टा विकास न चाहिए ...बस इनका इस्लाम मजबूत हो जाये और इन्हें कुछ ना चाहिए...आया समझ या नहीं ...हिंदुओ को लॉलीपॉप न चुसाओ विकास के पापा जी ...हिंदुओ की बहुत उम्मीदें जुड़ी हैं आपसे ..
अब आप खुद ही सोच लीजिये कि आप क्या कर रहे हैं, किसके लिए कर रहे हैं और किसके भरोसे कर रहे हैं......?
समझ जाओगे तो राज करोगे ...वरना हिन्दू तो हमेशा से मरता हुआ आया है पर एक बात और सुन लो विकास के बापू ..इन साढ़े तीन साल में जो तुमने हम हिंदुओं में राष्ट्रवाद का कीड़ा जगाया है वो कहीं तुम्हें ही न काट खाये ...क्योंकि अब हिन्दू पहले जैसा गूंगा बहरा व निहत्था नही है ...मुद्दे तो अब हल होंगे ही राजी राजी वरना गैर राजी ...कागजी शेर मत बनो ...वरना टांझ बराबर के लौंडे तुम पर रख कर हमें गरियाएँगे ..की बड़े आये 56 इंची के भक्त पर भ्रष्टाचारीओं का एक बाल तक ना उखड़ा ...और चले हैं देश चलाने ... अब चोरों का हाथ माँ भारती के सीने पर बढ़ने से पहले ...आपके राष्ट्रवाद का जूता चल जाना चाहिए इन कमीनो पर ..आगे आपकी अपनी मर्जी
वन्देमातरम
Comments
Post a Comment